Holashtak 2027 Start And End Date: होलाष्टक में क्या होता है?
होली का त्यौहार शुरू होने से 8 दिन पहले "होलाष्टक" शुरू हो जाता है। 2027 में होलाष्टक 14 मार्च से शुरू होकर 21 मार्च तक रहेगा। इन 8 दिनों को शुभ कामों के लिए वर्जित माना जाता है।

Holashak 2027 Date and Time
होलाष्टक 2027 शुरू: 14 मार्च 2027, रविवार - फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से
होलाष्टक 2027 समाप्त: 21 मार्च 2027, रविवार - फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि और होलिका दहन के दिन
होलिका दहन 2027: 21 मार्च 2027, रविवार शाम 06:33 बजे से 08:55 बजे तक
रंग वाली होली 2027: 22 मार्च 2027, सोमवार
होलाष्टक क्या है और क्यों मनाया जाता है?
होलाष्टक शब्द "होली + अष्टक" से बना है यानी होली के 8 दिन। पौराणिक कथा के अनुसार जब राजा हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे प्रहलाद को मारने की कोशिश की थी, तो ये 8 दिन बहुत कष्टदायक थे। भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया और भक्त प्रहलाद की रक्षा की।
इसीलिए इन 8 दिनों को अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि इन दिनों में किए गए शुभ काम जैसे शादी, गृह प्रवेश, नया व्यापार सफल नहीं होते। देवी-देवता भी इन दिनों में पृथ्वी पर नहीं आते।
होलाष्टक में क्या करें और क्या न करें
होलाष्टक में करने योग्य काम:
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें
- "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें
- गरीबों को दान और भोजन कराएं
- होलिका दहन की तैयारी करें
- भजन-कीर्तन करें
होलाष्टक में वर्जित काम:
- शादी-विवाह: इन 8 दिनों में शादी करना अशुभ माना जाता है
- गृह प्रवेश: नया घर लेना या गृह प्रवेश वर्जित है
- नया व्यापार: नई दुकान या व्यापार शुरू न करें
- नामकरण और मुंडन: बच्चे का नामकरण या मुंडन संस्कार न करें
- वाहन/प्रॉपर्टी खरीदना: नई गाड़ी या जमीन-जायदाद न खरीदें
होलाष्टक का धार्मिक महत्व
होलाष्टक के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। इसलिए ऋषि-मुनियों ने इन दिनों में पूजा-पाठ और साधना पर जोर दिया है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग इन 8 दिनों में संयम और भक्ति से रहते हैं, उन्हें होली के दिन विशेष फल मिलता है।
उत्तर भारत में खासकर पंजाब, हरियाणा, यूपी और राजस्थान में होलाष्टक का पालन बहुत सख्ती से किया जाता है। इस दौरान लोग मांस-मदिरा और तामसिक भोजन से भी दूर रहते हैं।
होलिका दहन 2027 की पूजा विधि
- होलिका दहन वाली जगह को साफ करके गोबर से लीपें
- लकड़ी और उपलों से होलिका बनाएं। बीच में प्रहलाद जी की मूर्ति रखें
- शाम को पूजा करके होलिका में अग्नि लगाएं
- होलिका की 5 या 7 बार परिक्रमा करें और "होलिकायै नमः" मंत्र बोलें
- अगले दिन होलिका की राख को घर लाकर तिजोरी में रखें। मान्यता है इससे धन की वृद्धि होती है
होलाष्टक 2027 - अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: क्या होलाष्टक में पूजा कर सकते हैं?
जवाब: हाँ, पूजा-पाठ, जप, दान और ईश्वर की भक्ति करना बहुत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से भगवान विष्णु और नृसिंह भगवान की पूजा करनी चाहिए।
सवाल 2: क्या होलाष्टक में सगाई हो सकती है?
जवाब: नहीं, सगाई भी विवाह का हिस्सा मानी जाती है। इसलिए होलाष्टक में सगाई करना भी वर्जित है।
सवाल 3: होलाष्टक 2026 में कब था?
जवाब: 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक था।
सवाल 4: क्या होलाष्टक दक्षिण भारत में भी मनाया जाता है?
जवाब: दक्षिण भारत में होलाष्टक का प्रचलन कम है। वहां ये नियम उतनी सख्ती से नहीं माने जाते।
निष्कर्ष: होलाष्टक के 8 दिन संयम और भक्ति के हैं। इन दिनों में कोई भी शुभ काम शुरू न करें। बस भगवान का नाम लें और होली के त्यौहार का इंतजार करें।