महाशिवरात्रि 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और निशिता काल समय
देवों के देव महादेव और माता पार्वती के मिलन का महापर्व 'महाशिवरात्रि' इस साल 06 मार्च 2027 शनिवार को पूरी श्रद्धा, उमंग और उत्साह से मनाया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था। हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिव भक्त बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत रखते है और पूजन करते है। लेकिन क्या आप जानते है कि साल 2027 के महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर ऐसा क्या दुर्लभ संयोग बन रहा है और पूजा के लिए सबसे उत्तम 'निशिता काल' का शुभ मुहूर्त क्या है? आज के इस लेख में हम आपको "महाशिवरात्रि 2027" के पावन पर्व की सभी जानकारी विस्तार से देंगे।

महाशिवरात्रि 2027 तिथि और शुभ मुहूर्त
फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि शुरू होने का समय (Mahashivratri 2027 shubh muhurat) 06 मार्च 2027 दिन शनिवार को दोपहर 12:04 pm।
चतुर्दशी तिथि समाप्त07 मार्च दिन रविवार की दोपहर 01:46 pm पर।
चार प्रहर की पूजा का समय
महाशिवरात्रि पर प्रथम प्रहर की पूजा का समय 06 मार्च 2027 शाम 06:24 pm से शुरू होकर रात्रि 09:28 मिनट तक रहेगा। महाशिवरात्रि पर द्वितीय प्रहर पूजा का समय रात 09:28 pm से शुरू होकर मध्यरात्रि 12:32 am तक, महाशिवरात्रि तृतीय प्रहर पूजा का समय 07 मार्च 2027 मध्यरात्रि 12:32 am से सुबह 03:36 am तक, महाशिवरात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा का समय सुबह 03:36 am से 06:40 am तक रहेगा।
महाशिवरात्रि 2027: निशिता काल पूजा मुहूर्त
महाशिवरात्रि निशिता काल पूजा का समय 07 मार्च 2027 को 12:07 am से मध्यरात्रि 12:57 am तक, 50 मिनट का रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निशिता काल में भगवान शिव स्वयं कैलाश पर्वत से पृथ्वी पर आते है और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते है और उनके दुःखो को दूर करते है।
निशिता काल का महत्व
ज्योतिष एवं शास्त्रों के अनुसार निशिता या निशिता काल का अर्थ होता है आधी रात का समय या गहन रात्रि, लेकिन अध्यात्म की दृष्टि से इसका बहुत महत्व है।
निशिता काल के समय की गणना
जब समय को आठ बराबर भागो में बांटा जाता है तो उसके बीच के समय को जो कि लगभग रात को 11:45 pm से 12:45 am का बनता है, को "निशिता काल" कहा जाता है और इसे "महानिशा" भी बोला जाता है।
निशिता काल का महाशिवरात्रि में महत्व
निशिता काल का महाशिवरात्रि में बहुत महत्व माना जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इसी समय भगवान शिव का शिवलिंग के रूप में प्राकट्य (ज्योतिर्लिंग का उदय) हुआ था, इसलिए-
- शिवरात्रि की सबसे मुख्य पूजा इसी समय की जाती है।
- शास्त्रों के अनुसार, निशिता काल में की गई पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है।
निशिता काल का तांत्रिक या आध्यात्मिक अर्थ
निशिता काल में क्या करें?
1.अभिषेक: निशिता काल में शिवलिंग पर गंगाजल और दूध से अभिषेक करने पर मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
महामृत्युंजय मंत्र:यदि कोई व्यक्ति बीमार है तो निशिता काल में महामृत्युंजय मंत्र का जाप उसके लिए "संजीवनी" होती है।
दीपक दान: निशिता काल में शिव मंदिर में जलाया गया दीपक जीवन का अंधकार (कष्ट) दूर कर देता है।
महाशिवरात्रि व्रत पारण समय
| पूजा का प्रहर / इवेंट | शुभ समय (06-07 मार्च 2027) |
|---|---|
| महाशिवरात्रि तिथि प्रारंभ | 06 मार्च, दोपहर 12:04 बजे से |
| महाशिवरात्रि तिथि समाप्त | 07 मार्च, दोपहर 01:46 बजे तक |
| निशिता काल (मुख्य पूजा) | मध्यरात्रि 12:07 से 12:57 (07 मार्च) |
| प्रथम प्रहर पूजा | शाम 06:24 से रात 09:28 तक |
| द्वितीय प्रहर पूजा | रात 09:28 से रात 12:32 तक |
| तृतीय प्रहर पूजा | रात 12:32 से तड़के 03:36 तक |
| चतुर्थ प्रहर पूजा | तड़के 03:36 से सुबह 06:40 तक |
| व्रत पारण का समय | 07 मार्च, सुबह 06:40 से दोपहर 01:48 तक |
महाशिवरात्रि व्रत पारण विधि
जिन शिव भक्तों को महाशिवरात्रि का व्रत रखना हो, उन्हे महाशिवरात्रि से एक दिन पहले अर्थात त्रयोदशी तिथि को एक समय का भोजन ग्रहण करना चाहिए। महाशिवरात्रि व्रत का पारण 07 मार्च को सुबह स्नान करके व्रत के पारण समय में व्रत का पारण करें। आपके परिवार की मान्यताओं के अनुसार जो भी व्रत पारण के नियम हो, आप उनका पालन करते हुए पारण कर सकते है।
महाशिवरात्रि 2027 की पूजा विधि
- स्नान और संकल्प: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- जलाभिषेक: शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक करें। जल में थोड़ा कच्चा दूध भी मिला सकते हैं।
- पंचामृत अभिषेक: दूध, दही, देसी घी, शहद और शक्कर से बना पंचामृत शिवलिंग पर अर्पित करें।
- श्रृंगार: बेलपत्र, धतूरा, भस्म, सफेद चंदन, अक्षत और जनेऊ भगवान शिव को अर्पित करें।
- धूप-दीप: शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती से आरती करें।
- मंत्र जाप: "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें। महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी शुभ है।
महाशिवरात्रि 2027 पूजा सामग्री लिस्ट
- अभिषेक के लिए: गंगाजल, कच्चा दूध, दही, देसी घी, शहद, शक्कर, पंचामृत
- शिव श्रृंगार: बेलपत्र, धतूरा, भस्म, सफेद चंदन, अक्षत, रोली, मोली, जनेऊ
- माता पार्वती के लिए: सोलह श्रृंगार का सामान, लाल चुनरी, सुहाग का सामान
- भोग-प्रसाद: मिठाई, ताजे फल, नारियल, इलायची, लौंग, सुपारी, पान के पत्ते
- अन्य सामग्री: पीला कपड़ा, शिव परिवार के वस्त्र, 5 या 11 मिट्टी के दीपक, धूप, अगरबत्ती, जौ, काले तिल, सिंदूर, पीली सरसों, अंगौछा
महाशिवरात्रि 2027: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: साल 2027 में महाशिवरात्रि कब है, 06 मार्च या 07 मार्च?
उत्तर: हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 06 मार्च 2027 को दोपहर 12:04 से शुरू होकर अगले दिन दोपहर 07 मार्च 01:46 तक रहेगी। इसलिए उदय तिथि और निशिता काल पूजा के आधार पर महाशिवरात्रि का पर्व 06 मार्च 2027, शनिवार को ही मनाया जाएगा।
प्रश्न 2: महाशिवरात्रि 2027 पर निशिता काल पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
उत्तर: महाशिवरात्रि की सबसे मुख्य पूजा निशिता काल (अर्धरात्रि) में की जाती है। इस साल निशिता काल का मुहूर्त 07 मार्च की सुबह 12:07 am से लेकर 07 मार्च की सुबह 12:57 am तक रहेगा, (06 मार्च और 07 मार्च की मध्यरात्रि)
प्रश्न 3: महाशिवरात्रि व्रत का पारण (Vrat Parana) किस समय करना चाहिए?
उत्तर: व्रत का पारण हमेशा चतुर्दशी तिथि समाप्त होने के बाद या सूर्योदय के बाद किया जाता है। महाशिवरात्रि व्रत पारण का सबसे उत्तम समय 07 मार्च 2027 को सुबह 06:40 am के बाद है।
प्रश्न 4: क्या महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर तुलसी चढ़ा सकते हैं?
उत्तर: नहीं, शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित है। शिवजी की पूजा में हमेशा बेलपत्र, धतूरा, शमी के पत्ते और गंगाजल का ही प्रयोग करना चाहिए।