सोमवती अमावस्या पर पितृदोष शांति के उपाय हिंदू शास्त्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण माने गए हैं। जब अमावस्या तिथि सोमवार को आए, उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। सोमवती अमावस्या के दिन किए गए पितृदोष शांति के उपाय जीवन की अनेक बाधाओं से मुक्ति दिलाते हैं। पितृदोष के कारण धन, संतान, विवाह, स्वास्थ्य और गृह क्लेश से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, इसलिए सोमवती अमावस्या के दिन पितरों की आत्मा की शांति हेतु विशेष पूजा, दान और कुछ सरल उपाय करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
शास्त्रों में इस दिन कुछ विशिष्ट पितृदोष निवारण के उपाय बताए गए हैं जिनसे जीवन के समस्त कष्टों का निवारण किया जा सकता है।
अगर आपके जीवन में लगातार दुःख बने रहते हैं, कार्यों में मेहनत के बावजूद सफलता नहीं मिलती और लगातार धन का अभाव रहता है तो ये पितृदोष के लक्षण हैं।
अन्य लक्षणों में संतान के भी कार्यों में बाधाएं और उनके विवाह में देरी भी पितृदोष को दिखाती है।
सोमवती अमावस्या पर पितृदोष के 9 अचूक उपाय
पितृदोष से पीड़ित व्यक्ति सोमवती अमावस्या के दिन अगर ये उपाय करे तो निश्चित ही उनके जीवन के समस्त कष्ट दूर होंगे तथा पितृदोष से मुक्ति भी मिलेगी।
1. पीपल पर जनेऊ और 108 परिक्रमा का उपाय:
सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष के पास दो जनेऊ लेकर जाएं। एक जनेऊ पीपल देव का स्मरण करते हुए पीपल के पेड़ पर लपेट दें। दूसरा जनेऊ भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए उसी पीपल के पेड़ पर अर्पित कर दें। फिर पीपल देव और भगवान विष्णु की प्रार्थना करें और परिक्रमा करते वक्त "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः" का जाप करते रहें। उसके बाद 108 बार पीपल वृक्ष की परिक्रमा करके शुद्ध रूप से तैयार की गई एक मिठाई पीपल वृक्ष को अर्पित करें। परिक्रमा पूरी होने के बाद भगवान विष्णु से दोनों हाथ जोड़ कर अपने जाने-अनजाने अपराधों के लिए क्षमा मांगें। सोमवती अमावस्या के दिन की गई इस पूजा से जल्दी ही उत्तम फलों की प्राप्ति होने लगती है।
2. दक्षिण दिशा में खीर का भोग:
सोमवती अमावस्या के दिन दूध से बनी खीर दक्षिण दिशा में पितरों की फोटो के समक्ष कंडे की धूनी लगाकर पितरों को अर्पित करने से भी पितृदोष में कमी आती है।
3. ब्राह्मण को भोजन और वस्त्र दान:
सोमवती अमावस्या के दिन अपनी श्रद्धा अनुसार ब्राह्मण को भोजन कराएं एवं दक्षिणा में वस्त्र दान करने से पितृदोष में कमी आती है।
4. कौवे और मछलियों को लड्डू खिलाएं:
सोमवती अमावस्या के दिन अपने आसपास के वृक्ष पर बैठे कौओं और जलाशयों की मछलियों को चावल और घी मिलाकर बनाए गए लड्डू दें। यह पितृदोष को दूर करने का सरल एवं उत्तम उपाय है।
5. प्रत्येक शनिवार पीपल पूजा:
पितृदोष की शांति के लिए अमावस्या के अतिरिक्त भी प्रति शनिवार पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाकर दीपक जलाएं और 7 परिक्रमा करें।
6. परिवार से सिक्के एकत्र कर मंदिर में दान:
अपने परिवार के सभी सदस्यों से सिक्कों के रूप में कुछ पैसे एकत्र करें और रविवार को किसी मंदिर में दान कर दें। इससे भी पितृदोष का प्रभाव कम होता है।
7. सूर्य को लाल चंदन मिलाकर जल अर्पित करें:
सूर्य देव को सुबह जल अर्पित करें और लोटे में थोड़ा सा लाल चंदन पाउडर या लाल गुलाब की पंखुड़ियां मिला लें। रोजाना ऐसा कर सकें तो अच्छी बात है, नहीं तो रविवार को अवश्य करें। इससे सूर्य मजबूत होता है और पितृदोष में राहत मिलती है।
8. पीपल के पेड़ की सेवा करें:
आपके आसपास या मंदिर में कोई पीपल का पेड़ हो तो उसकी सेवा करें। रोज जल अर्पित करें और शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाएं। पीपल में पितरों का वास माना जाता है।
9. हनुमान चालीसा का पाठ करें:
रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करें और मांस, मदिरा से दूर रहें। हनुमान जी की कृपा से पितृदोष, शनि दोष और सभी बाधाएं दूर होती हैं।
सोमवती अमावस्या और पितृ दोष से जुड़े सवाल-जवाब
1. सोमवती अमावस्या पर पितृ दोष से मुक्ति का सबसे आसान उपाय क्या है?
दक्षिण दिशा में दूध से बनी खीर पितरों की फोटो के समक्ष कंडे पर रखकर भोग लगाना सबसे आसान उपाय है। इससे पितृ दोष में कमी आती है।
2. क्या पीपल की 108 परिक्रमा से पितृ दोष खत्म होता है?
हां, सोमवती अमावस्या पर पीपल वृक्ष पर जनेऊ लपेटकर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः' मंत्र के साथ 108 परिक्रमा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
3. पितृ दोष के लक्षण क्या हैं?
जीवन में लगातार दुख, मेहनत के बाद भी असफलता, संतान के कार्यों में बाधा और विवाह में देरी पितृ दोष के मुख्य लक्षण हैं।
4. सोमवती अमावस्या पर ब्राह्मण को क्या दान करना चाहिए?
इस दिन श्रद्धा अनुसार ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा में वस्त्र या धन का दान करें। इससे पितर प्रसन्न होते हैं।
5. सोमवती अमावस्या कब आती है?
जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यह साल में 1-2 बार ही आती है।
सोमवती अमावस्या का महत्व
स्कंद पुराण के अनुसार सोमवती अमावस्या पर मौन रहकर स्नान-दान करने से हजार गायों के दान के बराबर फल मिलता है। पितृदोष के अलावा कालसर्प दोष की शांति के लिए भी ये अमावस्या सर्वोत्तम मानी गई है। इस दिन गंगा स्नान, दीपदान और पीपल पूजा का विशेष महत्व है।
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