ॐ जय जगदीश हरे आरती - विष्णु जी की आरती

विष्णु भगवान को इस जगत का पालनहार माना जाता है। ओम जय जगदीश हरे आरती विष्णु भगवान जी को समर्पित है। जीवन में हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति के लिए विष्णु भगवान का स्मरण अवश्य करना चाहिए।

Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics Hindi Me 2026

ॐ जय जगदीश हरे आरती के बोल हिंदी में

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे
भक्तजनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे

ॐ जय जगदीश हरे

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का, स्वामी दुःख बिनसे मन का
सुख संपति घर आवै, सुख संपति घर आवे, कष्ट मिटे तन का

ॐ जय जगदीश हरे

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी, स्वामी शरण गहूं मैं किसकी
तुम बिन और न दूजा, तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी

ॐ जय जगदीश हरे

तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी, स्वामी तुम अंतर्यामी
पारब्रह्म परमेश्वर, पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी

ॐ जय जगदीश हरे

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता, स्वामी तुम पालनकर्ता
मैं मूर्ख फलकामी, मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता

ॐ जय जगदीश हरे

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति
किस विधि मिलूं दयामय, किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति

ॐ जय जगदीश हरे

दीनबंधु दुःख हर्ता, ठाकुर तुम मेरे, स्वामी रक्षक तुम मेरे
अपने हाथ उठाओ, अपने शरण लगाओ, द्वार पड़ा तेरे

ॐ जय जगदीश हरे

विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वामी कष्ट हरो देवा
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा

ॐ जय जगदीश हरे

तन मन धन सब है तेरा, स्वामी सब कुछ है तेरा
तेरा तुझको अर्पण, तेरा तुझको अर्पण, क्या लगे मेरा

ॐ जय जगदीश हरे

श्री जगदीश जी की आरती, जो कोई नर गावे
कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपति पावे

ॐ जय जगदीश हरे

जय जगदीश हरे, स्वामी जय दीनानाथ हरे
भक्तजनों के संकट, दासजनों के संकट, क्षण में दूर करे

ॐ जय जगदीश हरे।

ॐ जय जगदीश हरे आरती का महत्व और महिमा

ॐ जय जगदीश हरे आरती भगवान विष्णु को समर्पित सबसे लोकप्रिय और शक्तिशाली आरती है। इस आरती की रचना श्रद्धा राम फिल्लौरी जी ने की थी। माना जाता है कि इस आरती का रोजाना पाठ करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। विष्णु भगवान को पालनहार कहा जाता है, इसलिए वे अपने भक्तों के सभी कष्ट क्षण भर में दूर कर देते हैं।

इस आरती में भगवान से प्रार्थना की गई है कि वे हमारे मन के दुख, तन के कष्ट और जीवन की परेशानियां दूर करें। "दीनबंधु दुःख हर्ता" कहकर भगवान को गरीबों और असहायों का सहारा बताया गया है। जो भी भक्त सच्चे मन से इस आरती को गाता है, उसके जीवन में नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

गुरुवार के दिन पीले वस्त्र पहनकर, पीले चंदन और पीले फूलों से भगवान विष्णु की पूजा करके यह आरती करने से विशेष फल मिलता है। मान्यता है कि इस आरती को 108 बार पढ़ने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। विद्यार्थियों को विद्या, व्यापारियों को धन और गृहस्थों को सुखद दांपत्य जीवन की प्राप्ति होती है।

आज के समय में जब तनाव और चिंताएं बहुत बढ़ गई हैं, तब यह आरती मन को शांति देती है। आरती के समय जो शंख और घंटी की आवाज होती है उससे घर की नकारात्मक ऊर्जा बाहर चली जाती है। इसलिए हर हिंदू परिवार में सुबह-शाम इस आरती को गाने की परंपरा है।

संक्षेप में कहा जाए तो ॐ जय जगदीश हरे आरती केवल प्रार्थना ही नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने का मार्ग भी दिखाती है। यह हमें सिखाती है कि "तेरा तुझको अर्पण" - यानी जो कुछ भी हमारे पास है वह सब भगवान का दिया हुआ है। इस भाव से जीवन जीने वाला व्यक्ति हमेशा खुश और संतुष्ट रहता है।

आरती करने का सही समय

सुबह और शाम दोनों समय विष्णु जी की आरती कर सकते हैं। गुरुवार का दिन विशेष फलदायी माना जाता है।

ॐ जय जगदीश हरे आरती से जुड़े सवाल-जवाब FAQ

1. ओम जय जगदीश हरे आरती किस भगवान की है?

ॐ जय जगदीश हरे आरती भगवान विष्णु को समर्पित है। जगदीश का अर्थ है जगत के ईश्वर, यानी विष्णु जी। कुछ लोग इसे नारायण जी की आरती भी कहते हैं।

2. ॐ जय जगदीश हरे आरती करने का सही समय क्या है?

सुबह और शाम दोनों समय कर सकते हैं। गुरुवार का दिन विष्णु जी को समर्पित है, इसलिए गुरुवार को पाठ करने से विशेष फल मिलता है। एकादशी के दिन भी करना शुभ माना जाता है।

3. क्या ओम जय जगदीश हरे आरती रोज करनी चाहिए?

हां, रोज सुबह-शाम करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है। मानसिक तनाव दूर होता है और नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है। समय न हो तो सिर्फ गुरुवार को जरूर करें।

4. ॐ जय जगदीश हरे आरती करने के क्या लाभ हैं?

1. घर में सुख-समृद्धि आती है
2. कष्ट और परेशानियां दूर होती हैं
3. मानसिक शांति मिलती है
4. पारिवारिक कलह खत्म होता है
5. मनवांछित फल की प्राप्ति होती है

5. क्या आरती करते समय दीपक जलाना जरूरी है?

हां, घी का दीपक जलाकर आरती करना सबसे शुभ माना जाता है। अगर दीपक न हो तो मन से श्रद्धापूर्वक आरती गा सकते हैं। भाव सबसे जरूरी है।

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